अभियान

पुलिस क्यों डरती है भिखारियों को जेल में डालने से !

देश में भिखारियों का आतंक दिनोंदिन बढ़ता ही जा रहा है.

नौबत यहां तक आ पहुंची है कि आज भिखारियों से सड़क पर चलता आम आदमी ही नहीं पुलिस भी डरती है.

पुलिस से जुड़े लोगों का इन भिखारियों को लेकर उनका जो अनुभव है वह बहुत ही खराब है. पहले के भिखारी और अब के भिखारियों में काफी अंतर हैं. पहले जो लोग चैराहों पर भीख मांगते थे वे अक्षमता या पेट भरने के लिए भीख मांगते थे.

लेकिन आज जो लोग भीख मांग रहे हैं उनमें से अधिकांश नशे खोरी से जुड़े हुए हैं और ये लोग एक या दो नहीं बल्कि कई कई लोगों के ग्रुप में रहते हैं. पुलिस ने इनको उठाकर कई बार थाने में लाकर बंद भी किया. लेकिन ये लोग ड्रग्स आदि नशीले पदार्थों के सेवन के इस कदर आदि हो गए हैं कि इनको एक निश्चित समय के बाद नशा चाहिए होता है.

यदि इनको नशा न मिले तो पागल हो जाते हैं. देखा गया है कि जब जनता को ये लोग अधिक परेशान करने लगे तो इनकों उठाकर पुलिस ने लाकप में डाल देते हैं तो रात में ये पूरा थाना सर पर उठा लेते हैं.

ये भिखारी जोर जोर से चिल्लाने लगते हैं.

कुछ तो बेहोश हो जाते हैं जबकि कुछ के मुंह से झाग आने लगते हैं. शुरू में तो पुलिस को भी लगा कि ये लोग बाहर निकलने के लिए ड्रामा कर रहे हैं. इनको शांत कराने के लिए इनके साथ हल्का बल प्रयोग किया. लेकिन जब देखा कि इन पर इसका कोई असर नहीं हो रहा है तो फिर डाक्टरों से संपर्क किया गया.

पुलिस को डर था कि कहीं लाकप में इनको कुछ हो गया तो बात उल्टी न पड़ जाए. बहरहाल, डॉक्टरों ने बताया कि ड्रग्स एडिक्ट लोगों के साथ ऐसा होता है. या तो आप इनको नशा लाकर दीजिए नहीं तो ये ऐसे ही परेशान करते रहेंगे.

यही कारण है कि पुलिस इनको पकड़ने से बचती है, क्योंकि यदि इनकों जबरदस्ती पकड़कर नशामुक्ति केंद्र में भेज भी दिया जाता है तो ये वहां से भागकर फिर वहीं आ जाते हैं.

इतना ही नहीं कई बार तो इन भिखारियों में जो चरसी होते हैं वे पुलिस से बचने के लिए अपने शरीर पर स्वयं ही ब्लेड या धारधार हथियार से हमला कर खून निकाल लेते हैं. ऐसे में इन भिखारियों से निपटना पुलिस के लिए बेहद मुश्किल हो जाता है. क्योंकि इन भिखारियों के साथ कोई भी अप्रिय घटना हो जाने के बाद मानवाधिकार आयोग और आला अधिकारियों को जवाब देना पुलिस के लिए मुश्किल हो जाता है. ऐसे में होता यही है कि पुलिस भी इन पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पाती है.

दरअसल, हाल के वर्षों में देश के विभिन्न शहरों में भिखारियों की संख्या में काफी वृद्धि हुई हैं. भिखारियों की इस बढ़ती तादाद को लेकर पुलिस प्रशासन से लेकर आम लोग तक हैरान है.

पहले जहां चौराहों पर इक्का दुक्का भिखारी ही भीख मांगते दिखाई पड़ते थे. अब वहां दस से बारह लोगों का झुंड भीख मांगने के लिए खड़ा रहता है. भिक्षावृति की आड़ में नशाखोरी करने वाले इस भिखारियों के झुंड से पुलिस को निपटना बेहद टेढ़ी खीर साबित हो रहा है.

ऐसे में हमारे देश को भिखारी मुक्त बनाने के लिए सर्व प्रथम भिक्षावृति और उसकी आड़ में होने वाली नशा खोरी रोकने के लिए एक बेहद सख्त कानून की आवश्यकता है.

भारत को भिखारी मुक्त बनाने के लिए यंगिस्थान ने एक मुहिम शुरू की है.

इस मुहिम का मकसद ही यही है कि इस दिशा में जन जागृति लाकर सरकार पर दवाब बनाया जाए कि वह इस दिशा में आगे आए और काननू में बदलाव कर इस समस्या का कोई स्थाई समाधान निकाले.

इसके अलावा यंगस्थिान अपने पाठकों से भी अपील करता है कि वे भी भारत को भिखारी मुक्त बनाने में इस मुहिम में सहयोग करें.

Vivek Tyagi

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Vivek Tyagi

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