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बाज़ार में आये प्लास्टिक के चावल, कही आप तो इसे नहीं खा रहे?

प्लास्टिक के चावल

ये पढ़कर अचंभित होनी की ख़ास आवश्यकता तो है नहीं कि ऐसा भी कभी को सकता है?

भारत में चाट, पूरी भाजी, वड़ापाव, डोसा के आलावा सस्ता और ज्यादा प्रमाण में क्या मिलता है तो वो है स्ट्रीट फ़ूड चाइनीज़.

यही वजह है भारत में चीनी इलेक्ट्रोनिक्स वस्तुओं की तो भरमार है साथ में अब खान पान में भी चीन यहा अग्रणी होता जा रहा है. रीटेल से लेकर मॉल में हर जगह चीनी सॉस, फल , सब्जी, रेड़ी टू ईट उत्पाद उपलब्ध है. भारतीय उत्पादनों से सस्ते ये प्रोडक्ट्स को लोग अधिक खरीदते है परन्तु खरीदते वक़्त ये ध्यान देना भूल जाते है की ये सामग्री हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है भी या नहीं.

फ्राइड राईस, बिरयानी और पुलाव के दिवानो को यह पता होना चाहिए की चावल अब खेत में नहीं मशीनों में प्लास्टिक से बनते है.

क्या है ये प्लास्टिक चावल ?

दरअसल, यह सिंथेटिक चावल आम चावल की तरह ही दिखाई देते है. जिस तरह अनगिनत साधारण चावल पानी में पकते और गलते है. बिलकुल उसी तरह ये सिंथेटिक चावल पानी में पकते और गलते है. इनका रंग भी वैसे ही होता है जो अन्य चावलों का होता है. इनको ख़ास करके पोष्टिक चावलों में मिलाकर बेचा जा रहा है जिससे किसी को सीधे शक ना हो.

कैसे बनते है ये चावल ?

सिंथेटिक चावल जो प्लास्टिक से बनते है. उनको आम चावलों का आकार दिया जाता है. ये चावल कभी ख़राब नहीं होते और लम्बे समय तक अच्छे रहते है.

प्लास्टिक चावल पर अपील

अपील में कहा गया, ‘‘वैश्वीकरण  के चलते चीन से बड़ी मात्रा में चावल का आयात किया जा रहा है तथा दालों का भी विभिन्न देशों से आयात हो रहा है. लेकिन उनकी गुणवत्ता की जांच नहीं कराई जाती.’’ इसमें आरोप लगाया गया है कि चीन से आयातित चावल में प्लास्टिक चावल शामिल है तथा सामान्य व्यक्ति इसमें एवं सामान्य चावल में भेद नहीं कर सकता.

इस अपील में यह भी कहा गया है की जो फल सब्जिया बाहर देश से आ रहे है. वह ज्यादा दिनों तक अच्छे रहने के लिए खतरनाक रसायनों का इस्तमाल किया जा रहा है. जिस पर भी कार्यवाही होनी आवश्यक है.

न्यायालय का क्या कहना है ?

दिल्ली उच्च न्यायालय ने उस अर्जी पर सुनवाई करने के लिये सहमत हो गया जिसमें आरोप लगाया गया है कि प्लास्टिक से बने और चीन से आयातित चावल देश में बेचा जा रहा है. मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी और न्यायमूर्ति जयंतनाथ की पीठ ने कहा कि वह इस अर्जी पर 20 अगस्त को सुनवाई करेगी. अर्जी में आरोप लगाया गया है कि इस चावल को वास्तविक चावलों के साथ मिलाकर बेचा जा रहा है.

सेहत पर असर ?

आम चावल को भी सब लोग नहीं खा सकते है.

अब ये तो प्लास्टिक का बना चावल है. आम चावल कुछ मरीजो के लिए हानिकारक है जैसे की मधुमेह ज्यादा प्रमाण में हो. किंतु प्लास्टिक के चावल वैसे भी प्राकृतिक नहीं है, ऐसे में उसका सेवन शरीर को हानिकारक  ही होना है. एक छोटी कटोरी इस चावल का एक पॉलीथीन के बराबर है. ऐसे में यह चावल बच्चों पर कितना बुरा असर डाल सकते है इस के बारे में सोचने से ही रोंगटे खड़े हो जाते है. कैंसर, किडनी स्टोन जैसे बड़े रोगों के साथ छोटी मोटी बीमारिया यह चावल खाने से होना संभव है.

ये समझ में नहीं आ रहा कि भारत किस ओर प्रगति कर रहा है और कैसा व्यवसाइकरण कर रहा है.

विश्व भर से व्यवसाय और जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात किए उत्पादों का निष्ठा से जाँच पड़ताल क्यों नहीं करती जब की इस सभी देश भारत से निर्यात के वस्तुओं की पड़ताल करते है. यहा तक की पीएम/राष्ट्रपति की भी पड़ताल करने के बाद ही उनको उनके देश में प्रवेश दिया जाता है.

क्या इसे निर्बल प्रणाली कहे या चंद पैसों के लिए देश की जनता के जीवन के साथ किया सौदा कहे?

जो भी है लोगों को इसका जवाब चाहिए और सख्त कार्यवाही.

Neelam Burde

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Neelam Burde

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