इतिहास

नेहरू को प्यारी थी हिंसा और मारकाट ! लेकिन चीन के साथ युद्ध में यह हो गयी थी बड़ी भूल !

जवाहर लाल नेहरु वैसे गांधी जी के परम प्रिय शिष्य थे और आजादी से पहले अक्सर महात्मा गांधी जी के साथ ही रहते थे.

महात्मा गांधी से जवाहर लाल नेहरु ने कुछ सीखा हो या ना सीखा हो किन्तु अहिंसा का पाठ गांधी जी से कभी सीख नहीं पाए थे.

जवाहर लाल नेहरु कहते थे कि देश की कोई भी सरकार अहिंसक नहीं हो सकती है. वैसे इस बात पर गौर करें तो बात तो सच लगती है. शायद गांधी जी से कभी नेहरु ने यह सवाल किया भी हो कि क्या किसी देश की सरकार अहिंसक हो सकती है?

अब गांधी जी ने नेहरु को इस बात का क्या जवाब दिया होगा वह तो कोई जानता नहीं किन्तु संसद में एक बार नेहरु ने इस विषय पर जरुर बड़ा बोल्ड जवाब दिया था.

सवाल आचार्य कृपलानी का था

साल 1955 में जब लोकसभा के अन्दर भारत में पुर्तगाली औपनिवेशक भूक्षेत्रों पर सरकार की नीति पर बहस हो रही थी तब नेहरु ने संसद में बोला कि आचार्य कृपलानी ने सीधा एक प्रश्न किया था कि क्या हमारी सरकार अहिंसा से प्रतिबद्ध है? इस प्रश्न का उत्तर नहीं है. आगे नेहरु ने बोला था कि इन परिस्थितियों में कोई भी सरकार अहिंसक नहीं हो सकती है. अगर हम अहिंसा से जुड़े हुए होते तो हमारे पास सेना, नौसेना और वायुसेना नहीं होती. एक निश्चित दिशा में ले जाने वाली नीति का अनुसरण किया जा सकता है फिर भी मौजूदा परिस्थिति के कारण हिंसा के आदर्श पर अमल नहीं किया जा सकता है.

इस तरह से नेहरु ने संसद में यह बात साबित कर दी थी कि चाहे परिस्थितियों के कारण ही सही किन्तु वह गांधी जी के अहिंसा के आदर्श पर नहीं चल सकते हैं.

जवाहर लाल नेहरु को  देशहित के कारण ही हिंसा को अपनाना पड़ रहा था.

..मर्तीशिन की पुस्तक जवाहर लाल नेहरु के राजनैतिक विचार पुस्तक के अन्दर यह बात साफ़ लिखी हुई है कि नेहरु ने संसद में साफ़तौर पर बोला था कि हमारी सरकार अहिंसक नहीं हो सकती है.

किन्तु वहीं चीन के साथ युद्ध के समय नेहरु बन गये थे अहिंसक

लेकिन वहीँ दूसरी तरफ इसी पुस्तक में एक जगह यह भी जिक्र है कि जब चीन के साथ 1962 में युद्ध हुआ था तब अचानक से जवाहर लाल नेहरु को अहिंसा अच्छी लगने लगी थी.

युद्ध से पहले जब चीन भारत की सीमा में अपनी गतिविधि बढ़ा रहा था तब तक जवाहर लाल नेहरु शायद अहिंसक बन गये थे.

चीन से भारत की हार के बाद नेहरु के मान-सम्मान में भारी कमी आ गयी थी. गाँव के लोग तो जवाहर लाल नेहरु की इज्जत कर रहे थे किन्तु नगर के लोगों का नेहरु से मोहभंग हो गया था. नेहरु ने संसद में तब ब्यान भी दिया था कि वह ज़मीन हमारे किसी काम की नहीं है क्योकि वह बंजर है.

जवाहर लाल नेहरु जहाँ 1955 तक हिंसा से देश की रक्षा की बातें करते हुए नजर आये थे वहीँ दूसरी तरफ चीन युद्ध के समय अचानक से नेहरु का अहिंसक हो जाना काफी हैरान कर देता है. 55 केदशक में नेहरु को पड़ोसी देश भारत के लिए खतरा लगते थे किन्तु शायद इन्होनें कभी भी चीन जैसे खतरे से लड़ने के लिए तैयारी शुरू नहीं की थी.

(जवाहर लाल नेहरु के जीवन और विचारों पर अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए आपको लेखक ..मर्तीशिन की पुस्तक जवाहर लाल नेहरु के राजनैतिक विचार को आज ही खरीदकर पढ़ना शुरूकर देना चाहिए.)

Chandra Kant S

Share
Published by
Chandra Kant S

Recent Posts

इंडियन प्रीमियर लीग 2023 में आरसीबी के जीतने की संभावनाएं

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) दुनिया में सबसे लोकप्रिय टी20 क्रिकेट लीग में से एक है,…

2 months ago

छोटी सोच व पैरो की मोच कभी आगे बढ़ने नही देती।

दुनिया मे सबसे ताकतवर चीज है हमारी सोच ! हम अपनी लाइफ में जैसा सोचते…

3 years ago

Solar Eclipse- Surya Grahan 2020, सूर्य ग्रहण 2020- Youngisthan

सूर्य ग्रहण 2020- सूर्य ग्रहण कब है, सूर्य ग्रहण कब लगेगा, आज सूर्य ग्रहण कितने…

3 years ago

कोरोना के लॉक डाउन में क्या है शराबियों का हाल?

कोरोना महामारी के कारण देश के देश बर्बाद हो रही हैं, इंडस्ट्रीज ठप पड़ी हुई…

3 years ago

क्या कोरोना की वजह से घट जाएगी आपकी सैलरी

दुनियाभर के 200 देश आज कोरोना संकट से जूंझ रहे हैं, इस बिमारी का असर…

3 years ago

संजय गांधी की मौत के पीछे की सच्चाई जानकर पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक जाएगी आपकी…

वैसे तो गांधी परिवार पूरे विश्व मे प्रसिद्ध है और उस परिवार के हर सदस्य…

3 years ago