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जब एक स्त्री के पीछे दीवाने हो गये थे दो बड़े देवता ! देवताओं के छल की सनसनीखेज दास्ताँ!

स्त्री के पीछे इतिहास में कई युद्ध हुए हैं.

ऐसा नहीं है कि इन युद्धों में स्त्री का हाथ था या फिर उन्होंने कोई चाल चली थी बल्कि स्त्री तो मात्र एक कारण ही होती थी.

ऐसी ही एक कहानी है, जो देव राज इंद्र से जुड़ी हुई है.

कहते हैं कि इंद्र देवता को एक स्त्री बहुत पसंद थी. ब्रह्मा जी ने जब इस स्त्री को बनाया था, तभी से इंद्र इस स्त्री के पीछे पागल थे. किन्तु इंद्र देवता को यह स्त्री जब नहीं मिली तो उन्हों अपनी कामवासना शांत करने के लिए एक जाल रचा था और उस जाल में वह खुद फँस गये थे.

तो आइये पढ़ते हैं स्त्री के दर्द और देवता के छल की यह कहानी – देवताओं के छल की कहानी

ब्रह्मा ने अहिल्या का निर्माण किया था.

जब देवताओं के राजा इन्द्र ने अहिल्या की सुन्दरता को देखा तो इन्होनें ब्रह्मा से अहिल्या को मांग लिया था. ब्रह्मा ने भी इंद्र को वचन दे दिया था. कुछ दिनों बाद जब अहिल्या युवती हो गयी तो ब्रह्मा ने उसे ऋषि गौतम को दिया ताकि गौतम ऋषि इस स्त्री को सामाजिक बातें सिखा दे. समाज और परिवार का भरण-पोषण कैसे होते है, यह सब अहिल्या सीख ले.

किन्तु अहिल्या पर गौतम ऋषि का दिल आया

अब बड़े-बड़े ऋषि और तपस्यालीन साधू भी कहाँ स्त्री मोह से बाख पाए हैं.

तो अहिल्या के साथ रहते-रहते, ऋषि गौतम का भी अहिल्या पर दिल आ जाता है. ब्रह्मा जी ने पहले ही गौतम को बताया था कि यह स्त्री इंद्र की है. कुछ समय बाद अहिल्या को इंद्र के पास दे आना. किन्तु गौतम ने उसको इन्द्र को नहीं दिया तथा उसका पाणिग्रहण अपने साथ ही कर लिया.

जब इंद्र को यह सब पता चला –

जब इंद्र को यह पता चला कि उसकी अहिल्या गौतम के पास है, तो वह चन्द्रमा के साथ गौतम के आश्रम में आया.

वहां पर इंद्र मुर्गा बने और आधी रात को ही बोल पड़े. चन्द्रमा को द्वारपाल बनाया कि अगर गौतम लौटे तो वह इन्द्र को सूचित कर सके. और इंद्र ने गौतम का छद्मवेश धारण कर के अहिल्या के साथ छल किया.

उधर गौतम मुर्गे की आवाज़ सुन ब्रह्म मुहूर्त समझ गंगा नदी पर स्नान के लिए जब पहुंचा और उसने अपना कमंडल भरने के लिए उसे नदी में डाला, तो माता गंगा बोलीं :- अरे भाई! तुम इस समय यहाँ क्या कर रहे हो?

माता गंगा! में यहाँ प्रतिदिन सुबह को स्नान के लिए आया करता हूँ. लेकिन आप ऐसा प्रश्न क्यों पूछ रही हो?

गौतम! अभी तो अर्धरात्रि ही है. अपने घर वापस जाओ क्योंकि राजा इंद्र तुम्हारी पत्नी के साथ छल कर रहा है.

अब गौतम फ़ौरन जल्दी जल्दी अपने घर की और को लौटे. जब वह गौतम ऋषि अपने घर पहुचे तो इन्होने देखा कि चन्द्रमा प्रहरी बना हुआ है. उन्होंने अपने गीले वस्त्र चन्द्रमा को सोंप दिए. इसीलिए चन्द्रमा गदला हो गया. अब वह कुटिया के अन्दर गए और अहिल्या को पत्थर होने का श्राप दे दिया. वहीं इंद्र को श्राप दिया कि तू सहस्रों भागों वाला हो जा.

लेकिन इसमें अहिल्या की गलती क्या थी?

अहिल्या सालों तक पत्थर बनी रही और जब श्री राम भगवान यहाँ आते हैं तो उस पत्थर को छूकर, फिर से अहल्या को जीवन देते हैं.

किन्तु इस देवताओं के छल की कहानी में अहिल्या की गलती नजर नहीं आती है. देवताओं के छल में गौतम ऋषि ने छल किया कि इन्होनें इंद्र को अहिल्या नहीं दी थी और इंद्र ने छल किया कि इन्होने दूसरे की पत्नी पर निगाह डाली.

किन्तु अहिल्या ने क्या छल किया?

इंद्र भी तो गौतम ऋषि के रूप में ही आये थे?

ये थे देवताओं के छल – लेकिन इस कहानी से सिद्ध होता है कि व्यक्ति कामवासना के लालच में पढ़कर सब कुछ भूल जाता है.

Chandra Kant S

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Chandra Kant S

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