राजनीति

योगी आदित्यनाथ ने खोला वो राज जिसे जानने के लिए हर कोई बेताब है !

उत्तर प्रदेश ही नहीं पूरे देश में लोगों की जिज्ञासा इस बात को जानने में है कि आखिर गोरक्षपीठ के महंत योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री कैसे बने.

इधर उधर के तमाम कयासों के बीच स्वयं योगी आदित्यनाथ ने खुलासा किया है कि उनकी मुख्यमंत्री बनने की कोई योजना नहीं थी.

वे तो अमेरिका जाने वाले थे. लेकिन अचानक एक फोन काल ने उनका विदेश जाने का पूरा कार्यक्रम ही नहीं बल्कि राजनीति जीवन की दिशा भी बदल दी.

दरअसल, बतौर योगी वे चुनाव खत्म होने के बाद थके हुए थे. इस बीच उनको पता चला कि सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल अमेरिका जाने वाला है. तो वे भी इसमें अपना नाम लिखाने के लिए दिल्ली चले गए और नाम लिखाकर वापस लौट आए.

लेकिन जैसे ही वो वापस गोरखपुर लौटे इसी बीच भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का फोन उनके पास आया और उन्होंने योगी से पूछा कि आप कहां हो. मैंने कहा कि अभी मैं दिल्ली से लौटा हूं.

तो उन्होंने कहा कि आपको यूपी जाना है. मैंने कहा मैं यूपी में ही हूं तो इस पर अमित शाह ने योगी सेे कहा कि आपको यूपी संभालना है. यानी आपको उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की जिम्मेंदारी दी जाती है.

योगी ने आगे बताया कि उन्हें जब दिल्ली बुला लिया गया तो जब वे दिल्ली पहुंचे उनके पास सिर्फ एक जोड़ी कपड़े थे।

अर्थात इस पूरे वाक्य से एक बात तो साफ हो गई कि योगी के नाम पर मुहर दिल्ली से लगी और योगी को यूपी की इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वपूर्ण भूमिका थी.

एक सामान्य छात्र से गोरक्षपीठ के महंत के उत्तराधिकारी बनने के साथ सांसद और फिर गोरक्षपीठ के महंत तथा अब योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बनने की यात्रा करीब ढाई दशक लंबी है.

इस यात्रा में योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री ने कई उतार-चढ़ाव देखे. उन तमाम अनुभवों को मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने खुद ही साझा किया. पहले योग शिविर और फिर पांच कालिदास मार्ग स्थित अपने सरकारी आवास में कार्यकर्ताओं को सम्मानित करते हुए योगी ने अपने जीवन से जुड़े कई राज बताए।

इसके जरिए योगी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को जमीन से जुड़े होने का संदेश भी दिया.

सरकार और संगठन के बीच समन्वय की मंशा से योगी ने जब कहानी सुनाई तब एक सामान्य व्यक्ति के सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने का भाव पूरी तरह झलक रहा था.

ऐसा करके वह कार्यकर्ताओं को उनकी अहमियत बता रहे थे. वह यही कहना चाह रहे थे कि कार्यकर्ता खुद को कम नहीं आंके. यदि वो मेहनत करेगा तो उसका उस तपस्या का फल जरूर मिलेगा.

Vivek Tyagi

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