राजनीति

जर्मनी क्यों सिखाना चाहता है मुस्लिम लड़कियों को स्विमिंग

मुस्लिम लड़कियों को स्विमिंग – यूरोपीयन देश जर्मनी चाहता है कि उसके देश में रहने वाली मुस्लिम छात्राओं को भी वे सभी अधिकार और स्वतंत्रता मिले जो जर्मनी के बाकी नागरिकों को मिलते हैं.

इसके लिए धर्म को आड़े नहीं आना चाहिए.

यही वजह है कि जर्मनी के सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि जर्मनी के स्कूल कालेजों में पढ़ने वाली मुस्लिम लड़कियों को स्विमिंग सीखनी चाहिए. बाकी जर्मन छात्राओं की तरह जर्मन मुस्लिम लड़कियों को स्विमिंग क्लास का हिस्सा बनना चाहिए.

जर्मनी की कोर्ट का कहना है कि स्विमिंग न करने के लिए इस्लामिक ड्रेस कोड का हवाला देना गलत है.

दरअसल, जर्मनी के स्कूल में पड़ने वाली 11 साल की एक मुस्लिम छात्रा के परिजनों को स्विमिंग के दौरान पहने जाने वाले कपड़ों को लेकर आपत्ति थी. वे नही चाहते थे कि उनकी लड़की स्कूल में इन कपड़ों को पहनकर स्विमिंग करे. इसको लेकर उन्होंने स्कूल प्रशासन से विरोघ दर्ज किया. लेकिन स्कूल ने उनकी लड़की को स्विमिंग क्लास में गैर हाजिर रीने से छूट देने से मना कर दिया.

इसको लेकर छात्रा के परिजनों ने कोर्ट से अपील की थी कि स्विमिंग के दौरान पहने जाने वाला बुर्कीनी और फुल बॉडी स्विमसूट इस्लामिक ड्रेस कोड के खिलाफ है, इसलिए उसे स्विमिंग क्लास में शामिल होने से छूट दी जाए.

लेकिन कोर्ट ने लड़की के माता-पिता की इस अपील को खारिज कर दिया.

आपको बता दे यह फैसला ऐसे समय में आया है जब जर्मनी में लाखों की तादाद में मुस्लिम शरणार्थियों के आने से इन दिनों देश के अंदर इस्लाम की भूमिक को लेकर बहस छिड़ी हुई है.

कुछ दिन पूर्व ही जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने देश में मुस्लिम महिलाओं के बुर्का पहनने पर बैन लगाने की बात कही थी. इतना ही नहीं मर्केल ने कहा कि पिछले साल बड़ी तादाद में जर्मनी में मुस्लिम शरणार्थी आए थे, लेकिन अब दोबारा ऐसा नहीं होगा. साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि जर्मनी में नए-नए आने वालों को यहां के समाज में घुलना मिलना होगा.

इसमें बुर्का को खारिज करना भी शामिल है.

गौरतलब है कि जर्मनी में भी चांसलर पद के लिए चुनाव होने वाले हैं. और चांसलर मर्केल का यह बयान भी ऐसे समय में आया है जब एक महीने पहले डॉनल्ड ट्रंप ने अमेरिका के राष्ट्रपति पद का चुनाव जीता.

इस वक्त अमेरिका ही नहीं पूरे यूरोप में कट्टर राष्ट्रवाद और लोकप्रियतावादी विचारों का उभार हो रहा है. इसमें देखा गया है कि दुनिया में अधिकांश देशों में मुस्लिम कट्टरपंथ को लेकर चिंताए पैदा हो रही है.

Vivek Tyagi

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