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क्योंकि हर एक फ्रेंड ज़रूरी होता है

अबतक आप देश की एक मोबाइल कंपनी के विज्ञापन की इस पंच लाइन से परिचित हो ही गए होंगे. यही कि ‘हर एक फ्रेंड ज़रूरी होता है’. मौज-मस्ती और जोश से लबरेज़ ये लाइन देश के युवाओं की एक नई पहचान उजागर करती है.

बचपन के दोस्तों से लेकर स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी और वर्किंग प्लेस तक आते-आते हमारे पास अपने दोस्तों का एक पूरा सर्किल या यूं कहें कि एक नेटवर्क बन जाता है. देखा जाए तो ये सच ही तो है कि दोस्तों के बिना ज़िंदगी फीकी और बेरौनक हो जाती है. फ्रेंड्स के बीच कोई भेदभाव, किसी तरह की फॉर्मेलिटी और छिपाव नहीं होता. चाहे कोई कुछ भी कहे पर इस बात से इंकार नहीं कर सकता कि बचपन से लेकर आजतक जितने भी फ्रेंड्स हमारी ज़िंदगियों में आते हैं वो हमारे लिए ख़ास बन जाते हैं.

अगर दुनियाभर में सबसे प्यारे रिश्ते की बात की जाए तो फ्रेंडशिप को टॉप पोजीशन हासिल होगी.

ज़रा याद करिए अपने स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी के दोस्तों को. तब बरबस ही कितना कुछ याद आ जाता है जैसे कॉलेज की कैंटीन में कटिंग टी और गरमा-गरम समोसे का मज़ा लेना हो या उनके साथ क्लास बंक करना हो. हमारे हर स्टेप पर वे हमारे साथ होते हैं. फ्रेंडशिप में हर चीज़ और बात शेयर होती है. वहीं, हॉस्टल की ज़िंदगी तो दोस्तों के सहारे ही चलती है. हॉस्टल में तो हमें बहुत कुछ शेयर करना पड़ता है. बुक्स, नोट्स, लैपटॉप, मोबाइल, जींस, टी-शर्ट, शूज़, बाइक और न जाने क्या-क्या. लड़ाई-झगड़ा तो जैसे रोज़ का ही होता था, बहस और तीखी नोंक-झोंक के बावजूद भी हमारा दिल हमेशा ही दोस्तों में रमता-जमता था.

असलियत में ब्लड रिलेशन से अधिक जुड़ाव और प्यार फ्रेंड्स में होता है क्योंकि दोस्त हम खुद अपनी मर्ज़ी से चुनते हैं, किसी मजबूरी में नहीं. अमूमन जो बातें हम अपने दोस्तों से साझा करते हैं वो बातें तो हम अपने पेरेंट्स और सगे भाई-बहनों से भी छिपा जाते हैं. आज सूचना क्रांति के युग में दोस्तों से जुड़े रहने के लिए सैकड़ों साधन मौजूद हैं. मॉर्निंग से इवनिंग तक हम किसी न किसी बहाने से दोस्तों से मिलने और बात करने के मौके तलाशते रहते हैं.

हमारे जीवन के हर पड़ाव पर नए दोस्त हमारी फ्रेंड लिस्ट में शामिल होते जाते हैं. हमारी फ्रेंड लिस्ट चाहे जितनी भी बड़ी क्यों न हो जाए लेकिन हर दोस्त हमारी ज़िंदगी में एक ख़ास रोल अदा करता है. हो सके तो थोड़ा लाइफ के फ़्लैश बैक में झांकिए, आपको एक नहीं बल्कि कई ऐसे वाकये याद आ जाएंगे जब आपके किसी दोस्त ने ही आपकी किसी न किसी तरह की मदद की होगी. दोस्तों के बीच कोई फॉर्मेलिटी नहीं होती इसलिए भी हम दोस्तों के किए गए एहसानों और मदद को अक्सर भूल जाते हैं.

नो सॉरी, नो थैंक्यू के पिलर पर खड़ा दोस्ती का ये रिश्ता दुनिया का सबसे खूबसूरत और प्यारा रिश्ता होता है. हां, कभी-कभार दोस्तों के बीच लड़ाई-झगड़ा और किसी बात पर नाराज़गी हो जाती है लेकिन लाख नाराज़गी और लड़ाई के बावजूद दोस्त एक-दूसरे का नुकसान कभी नहीं चाहते.

इस बदलते दौर में हमारे दोस्तों की लिस्ट बड़ी लंबी-चौड़ी हो गई है और किसी भी मोबाइल में दो-चार सौ मोबाइल नंबर होना आम बात हो गई है. लेकिन आज भी दोस्ती की एहमियत कम नहीं हुई है. इस बदलते दौर में एक ही दोस्त से सारी ज़रूरतों को पूरा नहीं किया जा सकता. आज की लाइफस्टाइल में तो हर दोस्त का एक ख़ास स्पेस होता है.

आज का तो यही कांसेप्ट है कि हर फ्रेंड ज़रूरी होता है.

यही उभरते इंडिया के युवाओं की सोच है जो सबके लिए जगह बनाते हुए लाइफ जीना और एन्जॉय करना चाहती है.

Devansh Tripathi

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Devansh Tripathi

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