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कॉलेज के कल्चरल इवेंट्स के पीछे क्या राज़ है आख़िर?

कॉलेज के कल्चरल इवेंट्स मज़े-मस्ती के लिए मशहूर हैं|

शायद यही कारण है कि बहुत से माँ-बाप अपने बच्चों को इन इवेंट्स से दूर रखने की कोशिश करते हैं कि वक़्त और पैसे की बर्बादी है और साथ में जो पढ़ाई का नुक्सान होता है, वो अलग!

पर यहीं उनकी सोच मात खा जाती है क्योंकि वो यह समझ नहीं पाते कि कॉलेज के कल्चरल इवेंट्स पढ़ाई जितने ही ज़रूरी हैं और ज़िन्दगी में बहुत काम आते हैं!

आईये बताऊँ ऐसे कॉलेज के कल्चरल इवेंट्स के 5 फ़ायदे:

1) इस तरह के इवेंट्स में हिस्सा लेकर बच्चे कॉलेज में मौजूद संसाधनों का इस्तेमाल कर सकते हैं और उन से ख़ुद को फायदा पहुँचा सकते हैं! किस तरह से एक इवेंट तैयार किया जाता है, किस तरह की चीज़ों का इस्तेमाल करना होता है, कैसे कॉलेज के प्रोफेसर्स और एडमिनिस्ट्रेशन की मदद लेकर उसे सफ़ल बनाया जाता है, ये सिर्फ़ एक इवेंट की सफ़लता नहीं, बल्कि बच्चों की भी सफ़लता होती है और जीवन में बहुत काम आती है!

2) ऐसे इवेंट्स में हिस्सा लेकर बच्चे एक नए सोशल सर्कल का भाग बनते हैं| चूंकि इन कामों में दिन-रात की भागा-दौड़ी रहती है, बच्चों का वक़्त घर से ज़्यादा नए लोगों के साथ बीतता है जहाँ नयी दोस्तियाँ पनपने के मौके बढ़ जाते हैं! यहाँ बनी दोस्तियाँ ना सिर्फ़ निजी जीवन में बल्कि प्रोफेशनल ज़िन्दगी में भी बहुत काम आती हैं!

3) सबसे बड़ा फ़ायदा ऐसे इवेंट्स का यह होता है कि अपने बारे में जानने का मौका मिलता है| पता चलता है कि किन चीज़ों में आप अच्छे हैं, किन में खराब, क्या पसंद है जिसे और निखारा जा सकता है वगैरह-वगैरह! शायद कोई एक्टर अच्छा हो तो कोई वक्ता! किसी की कामयाबी इवेंट ऑर्गनाइज़ करने की हो तो किसी की इवेंट को बेचने की! इसी नींव पर भविष्य संवारा जा सकता है!

4) ऐसा नहीं है कि इवेंट कर लिया और हो गया! बल्कि ऐसे इवेंट्स के बारे में बायो-डेटा में भी लिखा जा सकता है जो कि नौकरी लेने के वक़्त एक प्लस पॉइंट बन जाता है! कंपनियाँ ऐसे कैंडिडेट्स को ज़रूर तवज्जोह देती हैं जो पढ़ाई-लिखाई के अलावा भी कुछ जानते हैं, कुछ हुनर रखते हैं!

5) अगर इवेंट्स में हिस्सा लेने कि बजाये सारा वक़्त सिर्फ़ किताबों में ही गुज़ारेंगे तो इसकी क्या गारंटी है मार्क्स अच्छे ही आएँगे? और फिर इसकी भी कोई गारंटी नहीं है कि इवेंट्स में हिस्सा लेने से कुछ कमाल हो जाएगा| लेकिन हाँ, एक रिसर्च के मुताबिक जब इंसान का दिमाग अलग-अलग चीज़ों में बिज़ी रहता है तो उसके सफ़ल होने की संभावनाएं ज़्यादा बढ़ जाती हैं बजाये कि खाली दिमाग में सिर्फ़ एक ही तरह कि बातें होने के!

ऐसा नहीं है कि पढ़ाई बेकार और इवेंट्स ज़रूरी हैं या उसका उल्टा ही अटूट सत्य है| बस ज़रूरी है एक बैलेंस और सम्पूर्ण व्यक्तित्व का विकास जिसके लिए कॉलेज में हर चीज़ ज़रूरी है, चाहे वो एक कल्चरल इवेंट में स्टेज ही क्यों ना बनाना हो!

Nitish Bakshi

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