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जानिए इन जगह पर ही क्यों भिखारियों की संख्या अधिक होती है

भारत में नेता भले ही देश की नब्ज नहीं पहचानते हो लेकिन भिखारी जरूर जानते हैं कि लोगों की नब्ज पर कैसे पकडा जाता है.

यही वजह है कि आप देखेंगे कि भारत में भिखारी भीख मांगने के लिए ऐसे स्थानों को चुनते हैं जहां लोग उन्हें आसानी से भिखा देंदे. इसके लिए भिखारी कॉलेज और अस्पतालों को भीख मांगने के लिए  अधिक प्राथमिकता देते हैं.

भीख मांगने के लिए इन दिनों भिखारी कॉलेज और अस्पतालों को भीख मांगने के लिए  के बाहर बड़ी तादद में जाने लगे हैं. क्योंकि वहां पर अक्सर उनको भीख मिल ही जाती है.

ऐसा इसलिए होता है कि हमारे देश में लोग भगवान और दुआओं में बहुत विश्वास करते हैं और जो लोग अस्पताल में होते हैं उनमें से अधिकांश मुसीबत और परेशानी में ही होते हैं.

ऐसे समय में जब कोई भिखारी आकर उनसे भीख मांगते समय कहते हैं कि बाबूजी आप चिंता मत करो. ऊपर वाल बहुत दयालू हैं. आप भगवान पर भरोसा रखिए वह सब ठीक कर देगा. दुआ में दवाई से भी अधिक ताकत होती है. दुआ मुर्दों में भी जान डाल देती हैं.

ऐसे समय में भिखारी की बातें सुनकर मरीजों के परिजनों को लगता है कि न जाने इसकी ही दुआ लग जाए. इसलिए वे उसको पैसे दे देतें है. और इस प्रकार भिखारी का धंघा चल निकलता है. वह परेशानी में लोगों की भावनाओं को कैश करना सीख जाता है.

वहीं अस्पताल में जब लोग पहुँचते हैं तो वहां लोगों कों जीवन की सच्चाई पता लगती है कि जीवन में पैसा ही सब कुछ नहीं. इस कारण वे भावनाओं में आकर भिखारियों को अधिक पैसे दे देते हैं. इसका कारण इन दिनों भिखारियों को अस्पताल भीख मांगने की एक आसान जगह लगती है.

ठीक इसी प्रकार भिखारी कॉलेज और अस्पतालों के बाहर भी संख्या में जाते हैं. वहां भी उन्हें अच्छी खासी भीख कम मेहनत में मिल जाती है. क्योंकि आज कल जो छात्र छात्राएं यहां पढ़ने के लिए आते हैं उनके अंदर भी मानवीय सवेंदनाए काफी अधिक होती है.

जब वे किसी बुजुर्ग, महिला या बच्चे भिखारी कॉलेज और अस्पतालों के बाहर मांगते देखते हैं तो उन्हें लगता ये व्यक्ति काफी दिन से भूखा होगा या यह बहुत ही गरीब है जिस कारण इसको जीवन जीने में कठिनाई आ रही होगी. यदि वे उसे कुछ पैसे अपनी पॉकेट मनी में से दे देंगे तो उनकी मौज मस्ती में कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन हो सकता सकता है कि उनके द्वारा उसकी मदद करने से उस गरीब भिखारी के चेहरे पर कुछ देर के लिए खुशी आ जाए.

वहीं जब वे किसी बच्चे को भीख मांगते देखते हैं तो उनको लगता है कि इस गरीब के माता पिता के पास भी यदि पैसा होता तो वह भी आज किसी स्कूल या कॉलेज में पढ़ रहा होता, न कि स्कूल कॉलेज के बाहर भीख मांग रहा था.

आपको पता ही होगा कि कॉलेज और विश्वविद्यालयों में हजारों की तादाद में छात्र छात्राएं पढ़ते हैं. उनमें से यदि 100 ने भी दो दो रूपए भी दे दिए तो भिखारी का काम आसानी से बन जाता है.

यही वजह है कि भिखारी इन दिनों कॉलेज और अस्पतालों की ओर अधिक रूख कर रहे हैं.

Vivek Tyagi

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