भारत

सुप्रीम कोर्ट को नहीं पता मस्जिद इस्‍लाम का हिस्‍सा है या नहीं, ये सुन चकरा गया सबका सिर

भारत में अगर कोई कानूनी मामला सबसे ज्‍यादा लंबे समय तक अटका रहा है और जिसने सबसे ज्‍यादा दंगे और फसाद करवाए हैं वो है बाबरी मस्जिद का मामला । इस मसले को आजतक कोई भी सरकार या धार्मिक संगठन नहीं सुलझा पाया है।

अभी भी आए दिन अयोध्‍या में बाबरी मस्जिद को लेकर चर्चा होती रहती है और अब इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट का बयान आया है।

बाबरी मस्जिद का मामला –

क्‍या इस्‍लाम में मस्जिद होती है

इस मुद्दे पर चुप्‍पी तोड़ते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जवाब दिया है कि वो पहले इस बात पर फैसला सुनाएंगें कि क्‍याइस्‍लाम में मस्जिद धर्म का अभिन्‍न अंग है या नहीं। 25 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से ये बयान आया था। सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा नेता सुब्रह्मण्‍यमस्‍वामी की अयोध्‍या याचिका को खारिज करने के बाद ये बयान दिया था।

दरअसल, भाजपा नेता ने इस विवादित स्‍थल पर पूजा करने के अधिकार की मांग करते हुए याचिका डाली थी जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि वो पहले इस बात का फैसला करेंगें कि मस्जिद इस्‍लाम का अभिन्‍न हिस्‍सा है या नहीं।

बाबरी मस्जिद के जज

सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख न्‍यायाधीश दीपक मिश्रा इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं और उनकी अध्यक्षता वाली इस पीठ ने बाबरी मस्जिद या राम जन्‍मभूमिक के मुद्दे पर 20 जुलाई, 2018 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस मामले में मुस्लिम समुदाय ने पीठ से 1994 में जारी किए गए फैसले पर फिर से विचार करने को कहा है। उस फैसले में भी पीठ ने यही कहा था कि मस्जिद इस्‍लाम धर्म का अभिन्‍न अंग नहीं है।

अयोध्या मामले के मूल याचियों में से एक एम. सिद्दकी की मौत हो चुकी है। उनके कानूनी वारिस अब उनका प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनके कानूनी वारिस ने एम. इस्माइल फारूकी के मामले में 1994 में दिए गए फैसले के कुछ पहलुओं पर सवाल उठाया है।

भाजपा नेता की याचिका की बात करें तो उन्‍होंने अपनी याचिका में कहा है कि भगवान राम के जन्‍मस्‍थान पर बिना रोकटोक पूजा करने का अधिकार दिया जाना चाहिए। चार दीवानी मामलों में हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ के सामने कुल 14 अपील दायर की गई हैं। बाबरी मस्जिद का मामला जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट की तीन न्‍यायाधीशों की पीठ ने साल 2010 में दो अनुपात एक के बहुमत से सुनाए गए फैसले में इस जमीन को तीन बराबर हिस्‍सों में बांटने का फैसला सुनाया था। जिन तीन हिस्‍सों में इस जमीन को बांटा जाना था उसमें सुन्‍नीवक्‍फबोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलीला शामिल हैं।

बाबरी मस्जिद का मामला इतना पुराना है कि जो लोग उस समय पैदा भी नहीं हुए थे वो आज जवान हो चुके हैं। हिंदू-मुसलमान की इस खींचतान में कोई भी झुकने को तैयार नहीं है और सरकार एवं कानून को ये डर है कि फैसला जिसके हक में भी नहीं सुनाया गया वही समुदाय देश में दंगे और विरोध शुरु कर देंगें। इस वजह से भी अब तक फैसला अटका हुआ है।

Namrata Shastri

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