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	<title>suicide in depression Archives - Youngisthan.in</title>
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	<description>Empowering Youth</description>
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		<title>BBD स्टूडेंट ने डायरी में “बाबु आई लव यू” लिखकर खुद को मार डाला</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/lucknow-bbd-student-babu-i-love-you-suicide-10964/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Sagar Shri Gupta]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 01 Aug 2015 08:26:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष]]></category>
		<category><![CDATA[BBD]]></category>
		<category><![CDATA[crime]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[indian youth]]></category>
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		<category><![CDATA[suicide in depression]]></category>
		<category><![CDATA[लखनऊ]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/08/medical-student-suicide-in-lucknow-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="medical-student-suicide-in-lucknow" decoding="async" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" fetchpriority="high" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/08/medical-student-suicide-in-lucknow-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/08/medical-student-suicide-in-lucknow-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/08/medical-student-suicide-in-lucknow.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />कल लखनऊ के बाबु बनारसी दास यूनिवर्सिटी की एक मेडिकल छात्रा प्रिया गुप्ता ने फांसी लगा कर अपने होस्टल के कमरे आत्महत्या कर ली. फर्स्ट इयर की यह BBD स्टूडेंट अयोध्या की रहने वाली हैं. लखनऊ के चिनहट थाना क्षेत्र में आने वाले विश्वविद्यालय की इस घटना के बारे में उस क्षेत्र के एसओ राम [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/08/medical-student-suicide-in-lucknow-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="medical-student-suicide-in-lucknow" decoding="async" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/08/medical-student-suicide-in-lucknow-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/08/medical-student-suicide-in-lucknow-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/08/medical-student-suicide-in-lucknow.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>कल लखनऊ के <strong>बाबु बनारसी दास यूनिवर्सिटी</strong> की एक मेडिकल छात्रा प्रिया गुप्ता ने फांसी लगा कर अपने होस्टल के कमरे आत्महत्या कर ली.</p>
<p>फर्स्ट इयर की यह BBD स्टूडेंट अयोध्या की रहने वाली हैं.</p>
<p>लखनऊ के चिनहट थाना क्षेत्र में आने वाले विश्वविद्यालय की इस घटना के बारे में उस क्षेत्र के एसओ राम नरेश यादव ने बताया कि इस आत्महत्या की वजह अभी तक ज्ञात नहीं हो सकी हैं, लेकिन जांच चल रही हैं.</p>
<p>राम नरेश ने आगे बताते हुआ कहा कि प्रिया गुप्ता नाम की यह छात्रा BBD में मेडिकल की पढ़ाई कर रही थी. अपने पहले साल में प्रिया निर्मला होस्टल में रह रही थी. सुबह प्रिया के साथ होस्टल में रहने वाली अन्य लड़कियों ने जब  उसके रूम का दरवाज़ा खटखटाया तो प्रिया ने कोई जवाब नहीं दिया. कई बार आवाज़ा देने पर जब प्रिया ने दरवाज़ा नहीं खोला तो वार्डन को बुलाया गया. इसके बाद वार्डन ने पुलिस को इस बात की जानकारी दी.</p>
<p>इतना कुछ हो जाने के बाद जब रूम से कोई जवाब नहीं आया तब पुलिस को निर्मला होस्टल के कमरा नंबर 203 का दरवाज़ा तोड़ना ही पड़ा. दरवाज़ा खुलते ही प्रिया की लाश कमरे के पंखे से लटकी मिली. कमरे की तलाशी लेने पर पुलिस को प्रिया की एक डायरी मिली जिसमे उसने <strong>“बाबु आई लव यू”</strong> लिख दिया था. होस्टल की बाकि लड़कियों से जब बाबु के बारे में पुलिस ने पूछा तो कोई जानकारी नहीं मिल पाई लेकिन पुलिस मान रही हैं कि इस “बाबु” से प्रिया की मौत की अहम जानकारियाँ मिल सकती हैं.</p>
<p><strong>पुलिस ने कहा हैं कि प्रिया के कॉल डिटेल्स से इस शख्स के बारे में पता चल सकता हैं.</strong></p>
<p>पहली नज़र में यह पूरा मामला लव अफेयर का नज़र आ रहा था, लेकिन कॉलेज के बाकि छात्रो से बात करने पर पता चला कि प्रिया पिछले कई दिनों से कॉलेज के कुछ लोगों के कारण परेशान चल रही थी. सभी छात्रों ने अपनी इस बात का समर्थन करते हुए शाम को कॉलेज के पास एक कैंडल मार्च भी निकाला था, जिसके विरोध में पुलिस ने उन्हें हटाने के लिए उन लाठीचार्ज कर दिया था.</p>
<p>पुलिस ने इस बारे बात करते हुए कहा कि प्रिया के साथ उसके होस्टल में रहने वाली उसकी रूम पार्टनर निहारिका जो 22 जुलाई से छुट्टी पर हैं इस पुरे मामले को सुलझाने में हमारी सहायता कर सकती हैं लेकिन उसके आने से पहले अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता.</p>
<p>प्रिया की मौत के बारे में जब उसके परिजनों को बताया गया तो वह अयोध्या से लखनऊ पहुच कर कॉलेज के चीफ़ प्रोक्टर डॉ कामिल रिज़वी से बात मिले. प्रिया की माँ अपनी बेटी की मौत से इतनी आवेश में थी कि उन्होंने डॉ कामिल से कहा हमने अपनी बेटी को यहाँ डॉक्टर बनने भेजा था, आपने हमसे जितने पैसे मांगे, हम दिया पर आप हमारी बेटी का ध्यान नहीं रख पाए. डॉ कामिल के पास इस बात का कोई जवाब नहीं था.</p>
<p>प्रिया के मामा विनय गुप्ता से जब बात हुई तो उन्होंने बताया कि प्रिया बहुत सीधी-सादी लड़की थी, अपने काम से काम रखती थी. अभी कुछ दिन पहले ही उसने मुझे पैसे के लिए फ़ोन किया था और कहा था कि मामा इम्तिहान के कारण अभी बाहर नहीं निकल पाऊँगी इसलिए मेरे नंबर पर रिचार्ज करा दीजिये. प्रिया के मामा ने आगे कहा कि प्रिया पढ़ाई में बहुत अच्छी थी और क्लास में उसका अटेंडेंस भी हमेशा 90% के आसपास ही रहता था.</p>
<p>प्रिया की लाश को पोस्टमार्टम के लिए पुलिस ने भेजते हुआ कहा कि रिपोर्ट के बाद ही और अधिक जानकारी हमें मिल पायेगी.</p>
<p>वैसे भारत में नेशनल क्राइम ब्यूरों के मुताबिक 3.3% मौत, आत्महत्या से होती हैं. 2013-14 के एक सर्वे में करीबन 4495 आत्महत्याएं की वजह लव अफेयर बताई गयी थी. हर साल हर १ लाख में से 30-40 मौतें 15 से 29 साल के युवा करते हैं.</p>
<p>विश्व में युवाओं की आत्महत्या का यह आकड़ा भारत में सबसे अधिक हैं.</p>
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		<title>तेज़ रफ़्तार जीवन में क्यों बढ़ रहा है डिप्रेशन?  लोग क्यों कर रहे है आत्महत्या?</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/fast-life-depression-is-increasing-suicidal-mentality-6065/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Neelam Burde]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Jun 2015 07:05:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवन शैली]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[how to tackle with depression]]></category>
		<category><![CDATA[suicide in depression]]></category>
		<category><![CDATA[अवसाद से कैसे बचे]]></category>
		<category><![CDATA[किसान भी अवसाद से है पीड़ित]]></category>
		<category><![CDATA[डिप्रेशन कैसे होता है]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/06/depression-300x180.jpeg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="depression" decoding="async" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/06/depression-300x180.jpeg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/06/depression-400x240.jpeg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/06/depression.jpeg 620w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />आज की तारिख में जीवन बेहद आसान हो गया है. सारी चीजे फटाफट होती है और परिणाम भी जल्दी दीखते है. वक़्त के साथ इंसान की गति अधिक  तेज़ हो गई है. मानो इंसान अब वक़्त को हराने पे तुला है. लेकिन वक़्त से पहले किसी को कुछ हासिल नहीं हुआ है. वक़्त से पहले [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/06/depression-300x180.jpeg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="depression" decoding="async" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" loading="lazy" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/06/depression-300x180.jpeg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/06/depression-400x240.jpeg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/06/depression.jpeg 620w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>आज की तारिख में जीवन बेहद आसान हो गया है. सारी चीजे फटाफट होती है और परिणाम भी जल्दी दीखते है.</p>
<p>वक़्त के साथ इंसान की गति अधिक  तेज़ हो गई है. मानो इंसान अब वक़्त को हराने पे तुला है. लेकिन वक़्त से पहले किसी को कुछ हासिल नहीं हुआ है. वक़्त से पहले पाने की सोच ही इंसान को डिप्रेसन का शिकार बना देती है.</p>
<p>भारत में अवसाद (डिप्रेशन) के मरीज कुछ अधिक बढ रहे है. शहर के साथ गांव के लोग भी डिप्रेशन का शिकार हो रहे है. ख़ास करके युवा और किसान, जिसकी वजह से आत्म हत्या के आंकड़े बढे है.</p>
<p>अवसाद (डिप्रेशन) क्या है.</p>
<p>यह कैंसर से भी घातक  बिमारी है.</p>
<p>एक बार हो जाए तो मरीज जब तक खुद कोई सकारात्मक तबदीली नहीं लाता तब तक उसे इस पीड़ा से गुजरना पड़ता है.</p>
<p>लम्बे समय तक नकारत्मक सोच जब दिमाग में घर करती है तब ऐसी बिमारी उत्पन्न होती है.</p>
<p><strong>यह बिमारी कैसे और किसे होती है</strong><strong>?</strong></p>
<ul>
<li>अवसाद वैश्विक है और अनुवांशिक. तो ऐसे में यह बिमारी आपको भी हो सकती है.</li>
<li>पुरुषों से अधिक अवसाद महिलाओं को होता है.</li>
<li>अवसाद में आत्महत्या की प्रवृत्ति अक्सर निर्माण होती रहती है.</li>
<li>जो लोग जीवन में किसी बुरे समय से गए हो उनको यह बिमारी होनी बहुत सहज है.</li>
</ul>
<p><strong>महिला और बुजुर्गों में अवसाद थोडा बहुत सामान्य है.</strong></p>
<p>महिलांए जब अधिक तर माँ बनती है उस वक़्त अवसाद उसे घेर सकता है. जिसके चलते वह नवजात को अनदेखा तक कर सकती है.</p>
<p>उम्र हो जाने से भी कई बार नकारत्मक बाते दिमाग में आते रहती है. जिसके चलते बुजुर्ग ज्यादा तर चिडचिडे हो जाते है.</p>
<p><strong>अब बात करते है युवांओं की</strong></p>
<p>जैसे की मैंने कहा की जीवन बड़ी रफ़्तार से आगे बढ़ रहा है.</p>
<p>ऐसे में जीवन शैली सहज हो गई है.</p>
<p>खाना बनाने से लेकर पढाई के सारे काम टेकनोलोजी से होता है.</p>
<p>कुछ सामान भी खरीदना हो तो ऑनलाइन शॉपिंग होती है.</p>
<p>ऐसे में शारीर का लचीलापन खो रहा है.</p>
<p>केवल एक चीज हासिल करने के लिए जीवन भर जदोज़हद चलती है और वह नहीं मिलने पर मानसिक रूप से बेबस एवं हताशा सी छाने लगती है.</p>
<p>कोई आप को नकारता है तो वह सोच आपको अपराधिक भाव से जकड लेती है.</p>
<p>नौकरी में काम का दबाव और आकांक्षाओं पर खरे न उतर पाना.</p>
<p>किसी प्रतियोगिता में सफल न हो पाना. यह सारी बाते युवाओं को अवसाद से नहीं बचा पाते क्योंकि आज के युवा के पास धीरज नहीं है. उनको ऐसे लगता है कि हर एक चीज तेजी से जीवन में मिले.</p>
<p><strong>किसान भी अवसाद से पीड़ित </strong></p>
<p>पिछले एक दशक से किसान आत्महत्या कर रहे है.</p>
<p>कभी मौसम की मार फिर सरकार की मदत नहीं मिलती है.</p>
<p>किसानो कि इन समस्याओं का हल अब तक किसी सरकार ने नहीं निकला है.</p>
<p>ऐसे में सर पर बैंक का कर्जा और छाती पर परिवार का बोझ एक किसान कब तक ढोएगा.</p>
<p>खाने के लिए अनाज के लाले पड़े है,  ऐसे वक़्त में बेटी की शादी, लड़के की पढाई, माता पिता की बिमारी और अन्य सारी जरूरते कब पूरी करेगा.</p>
<p>इसी पीड़ा के निचे यह किसान हताश होते रहता है. इस आस में  की अगले वर्ष अच्छी फसल आएगी और कुछ मदद सरकार करेगी.</p>
<p>किंतु ऐसा कुछ नहीं होता आखिर में वह आत्महत्या जैसा जघन्य कदम उठा ही लेता है. और उसका परिवार भुखमरी की कगार पर आ जाता है.</p>
<p><strong>अवसाद से कैसे बचे?</strong></p>
<p>बाज़ार में अवसाद से लड़ने के लिए कई दवाइयां  है.  परन्तु उसके साथ योग और अपना आचार ब्यवहार बहुत जरुरी होता है,  सब कुछ डॉक्टर की दवा से ही सम्भव नहीं है.</p>
<ul>
<li>व्यायाम करना शुरू कर दो</li>
<li>परिवार के साथ दो वक़्त खाने पर रहना और बाते करना</li>
<li>मित्र और परिजनों से मेल बढाना</li>
<li>वक़्त निकालकर जरुरतमंदों की मदत करना</li>
<li>सहयोगी और सफ़र में लोगों को एक प्यारी मुस्कान देना</li>
<li>किसी चुटकुले की याद आने पर पर खुलकर हसना</li>
<li>हॉबीज का जतन करना और जूनून के साथ हमेशा अच्छा करना</li>
<li>अपेक्षाओं को कम और समझदारी को अधिक बढावा देना</li>
<li>हेल्दी खाना और अच्छे रहन सहन रखना</li>
<li>सुबह एक बार तो आईने के सामने तैयार होकर खुद की प्रशंसा करना</li>
</ul>
<p>नियमित रूप से आप अगर यह कोशिश करेगे तो कोइ भी बीमारी आपके करीब नहीं आएगी.</p>
<p>माना की सबको अपने दर्द बेहद ज्यादा लगते है. किंतु दुनिया में इससे भी अधिक दर्द और बदनसीब लोग होते है. जिनके पास पैसे तो होते है लेकिन खुशियाँ बाटने के लिए जानवर तक नहीं होते है.</p>
<p>सुप्रसिद्ध कलाकार जो निशब्द में अमिताब बच्चन के साथ नज़र आई जिया खान ने भी अपनी जिंदगी का अंत अवसाद में आकार किया.</p>
<p>इस लिए यह भूल जाइए की यह बीमारी गरीबों को ही होती है. केवल खुश रहिये और निस्वार्थ प्यार बाटिये.</p>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://www.youngisthan.in/hindi/fast-life-depression-is-increasing-suicidal-mentality-6065/">तेज़ रफ़्तार जीवन में क्यों बढ़ रहा है डिप्रेशन?  लोग क्यों कर रहे है आत्महत्या?</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://www.youngisthan.in/hindi">Youngisthan.in</a>.</p>
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