gramophone

गुमनामी में दम तोड़तीं बचपन की माँ वाली लोरियाँ..

मुझको लाकर दे दो,मेरा बचपन मेरा रूठना, वो मेरा रोना, माँ का प्यार मेरा माटी में खेलना, और अगर बचपन…

4 years ago

कहीं अब मिलते हैं क्या, ‘दादा’ जी के टाइम वाले म्यूजिक यन्त्र ???

घर के बुजुर्ग भगवान का रूप होते हैं. अकेले किसी कोने में बैठे हमारे दादा जी सारा दिन क्या सोचते…

4 years ago