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	<title>government fail to strengthen neer product Archives - Youngisthan.in</title>
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	<description>Empowering Youth</description>
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		<title>बोलना आसान &#8211; करना होता है मुश्किल, सरकार खुद के ब्रांड को नहीं बचा पाई</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/government-could-not-save-rail-neer-8670/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Neelam Burde]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 01 Jul 2015 12:36:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[विशेष]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[government fail to strengthen neer product]]></category>
		<category><![CDATA[Neer in trouble]]></category>
		<category><![CDATA[neer plant facing problem]]></category>
		<category><![CDATA[Neer plant got flop]]></category>
		<category><![CDATA[नीर प्रॉडक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[नीर प्रॉडक्ट हुआ फ्लॉप]]></category>
		<category><![CDATA[सरकार का ब्रांड]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/07/rail-neer-image-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="rail-neer-image" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/07/rail-neer-image-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/07/rail-neer-image-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/07/rail-neer-image.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />अब तो सरकार को कोसने से भी मन उब गया है. कोई एक वजह और जगह सरकार ने नहीं छोड़ी जहा सत्ताधारियों को  कोसा न जाए. सरकार को बड़े वायदे और दूसरों को नसीहत देने की बहुत ही गंदी आदत है. खुद तो अपनी जेबे भर रहे है साथ में अगर थोडा जनता के बारे [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/07/rail-neer-image-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="rail-neer-image" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" decoding="async" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/07/rail-neer-image-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/07/rail-neer-image-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2015/07/rail-neer-image.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>अब तो सरकार को कोसने से भी मन उब गया है.</p>
<p>कोई एक वजह और जगह सरकार ने नहीं छोड़ी जहा सत्ताधारियों को  कोसा न जाए.</p>
<p>सरकार को बड़े वायदे और दूसरों को नसीहत देने की बहुत ही गंदी आदत है. खुद तो अपनी जेबे भर रहे है साथ में अगर थोडा जनता के बारे में सोचे तो अब भारत की धरती पावन हो जायेगी.</p>
<p>कहते है पानी पिलाना एक पुण्य का काम है. मगर इस काम में भी सरकार पाप ही कर रही है, अपना काम ठीक से नहीं निभा पा रही है. सालों पहले यात्री सुविधाओं में बढ़ोतरी करने के उद्देश्य से आई.आर.सी.टी.सी द्वारा सरकार ने अपना पानी का एक ब्रांड “नीर” नाम से बाज़ार में लाया.</p>
<p>किंतु नीर को खडे होने से पहले ही सरकार ने उसका साथ छोड़ा और नीर जनता के प्याले से गिर गया.</p>
<p><strong>क्या नीर प्रॉडक्ट की आवश्यकता थी</strong><strong>?</strong></p>
<p>बाज़ार में बिसलरी, केनबार, अल्फा ब्लू, हिमालयन, गोल्डन व्याली जैसे नामचीन ब्रांड रेल्वे प्लेटफार्म पर अभी भी दिखाई देते है.</p>
<p>मगर यह निजी कंपनियों के पानी के बोतले रेल्वे प्लेटफार्म पर MRP से अधिक शुल्क में ग्राहकों तक पहुचते है. यही सबसे बड़ी वजह थी जिस कारण नीर को स्थापित किया. जिससे गरीब रथ में सवार यात्रियों को आखिर कार अच्छा पानी कम दाम में मिले.</p>
<p>इस लिए सरकारी  निजी कंपनी का मेल साझा करते हुए यस नीर को आखिर कार बोटलों में रेल यात्रियों तक पहुचाया. अनेक राज्य के विभिन्न शहरों में नीर के प्लांट लग गए. इस तरह यात्रियों के सेवा में नीर हाज़िर हो गया.</p>
<p><strong>नीर फ्लॉप कैसे हुआ </strong><strong>?</strong></p>
<p>सरकार ने नीर के प्रचार प्रसार में कोई कमी नहीं छोड़ी. जितनी तैयारी प्रॉडक्ट को बाज़ार में उतारने के लिए की गई उतनी ही तैयारी प्रॉडक्ट को अपनी जगह बनाने के लिए नहीं की.</p>
<p>नीर प्लांट के जमीन में पैसा खाने से लेकर प्लांट में काम कर रहे कर्मचारियों का तक पैसा नेताओं ने कंपनिओं के साथ मिल कर खाया.</p>
<p><strong>भ्रष्टाचार</strong> &#8211; रेलवे बोर्ड ने आईआरसीटीसी को अमेठी में 12000 रुपये प्रति स्क्वायर मीटर के रेट पर जमीन देने का प्रपोजल दिया तो कार्पोरेशन के आफिसर्स के हाथ-पैर फूल गए थे. अधिकारियों का तर्क था कि इतनी कीमत में तो लखनऊ के पॉश इलाके गोमतीनगर में जमीन मिल सकती है. रेल नीर प्लांट लगाने के लिए ५०००  वर्ग मीटर जमीन की जरूरत थी. आईआरसीटीसी प्रशासन ने कई बार रेलवे बोर्ड के ऑफिसर्स से मिलकर जमीन का रेट कम करने की बात उठाई. इसके बावजूद रेलवे 7600 रुपये प्रति स्क्वायर मीटर ने कम में जमीन देने पर राजी नहीं हुए। जबकि अमेठी का डीएम सर्किल रेट 3800 रुपए प्रति स्क्वायर मीटर था. हालांकि कार्पोरेशन के अधिकारी फिर  रेलनीर प्लांट लगाने के लिए इस रेट पर भी जमीन लेने को तैयार हुए.</p>
<p><strong>असमर्थ सरकार</strong> &#8211;</p>
<p>पश्चिम दिल्ली के नांगलोई की तरह कई ऐसे अन्य नीर प्लांट की शुरूआत बड़े अच्छे से हुई, लेकिन सालों बीतने के बाद भी यह प्लांट क्षमता के अनुरूप उत्पादन नहीं कर पाए. इसकी भी सुध विभाग नहीं ले रहे है, जिससे लाखों का नुकसान हो रहा है. मुंबई जैसे बड़े शहर में पिछले वर्ष अगस्त में अंबरनाथ में धूमधाम से शुरू हुआ ‘रेल नीर’ प्लांट अब बंद होने की कगार पर है, क्योंकि वेंडर इस प्रॉडक्ट को खरीद नहीं रहे हैं. वेस्टर्न और सेंट्रल रेलवे को अन्य ब्रैंड का मिनरल वॉटर बेचने की सहूलियत दी गई है. इसके पीछे ‘रेल नीर’ की अनुपलब्धता बताई गई, जबकि आईआरसीटीसी ने बताया कि उनके पास अब भी पर्याप्त स्टॉक पड़ा है.</p>
<p><strong>अवैध नीर प्लांट</strong> &#8211;</p>
<p>सिरगिट्टी में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा स्थापित किए जा रहे रेलनीर प्लांट पर जल संसाधन विभाग ने एतराज जताया. खारंग जल संसाधन विभाग ने मंडल रेल प्रबंधक को नोटिस भेजकर कहा था कि भूगर्भ जल के उपयोग के  बिना स्वीकृति लिए प्लांट की स्थापना अवैध और असंवैधानिक है. गौरतलब है कि सरकार को इसका भारी नुकसान हुआ.</p>
<p><strong>कर्मचारियों से मुफ्त में काम</strong> –</p>
<p>बिहार जैसे राज्य में ये आम बात है. २ से ३ महीने का पगार नीर प्लांट में काम करने वाले कर्मचारियों को नहीं मिलता. जिस कारण कई हड़ताल इन कर्मचारियों ने की. पहले से ही प्लांट की असमर्थता ने उसे मार दिया उस पर हड़ताल के कारण नीर के उत्पादन पर भारी नुकसान कंपनी और सरकार को उठाना पड़ रहा है.</p>
<p>योजना बना कर जिस तरह सरकार उसे अमल करना भूल जाती है. उसी तरह इस नीर को स्थापित करने के बाद वो जनता तक किस तरह नियमित रूप से पहुच पाएगा इस पर ध्यान नहीं दे पाई सरकार.</p>
<p>अगर सच में कोई अच्छा परिवर्तन लाने की इच्छा सरकार और लोगों के मन में है तो अपने काम के प्रति पूरी निष्ठा रखनी होगी. वरना डूबते  नीर की तरह एक दिन लोगों का विश्वास सरकार से उठ जाएगा और हमेशा के लिए विकाश पर रोक लग जाएगी.</p>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://www.youngisthan.in/hindi/government-could-not-save-rail-neer-8670/">बोलना आसान &#8211; करना होता है मुश्किल, सरकार खुद के ब्रांड को नहीं बचा पाई</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://www.youngisthan.in/hindi">Youngisthan.in</a>.</p>
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