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	<title>अकबर और महाराणा प्रताप Archives - Youngisthan.in</title>
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		<title>आखिर कौन था महान? अकबर या महाराणा प्रताप</title>
		<link>https://www.youngisthan.in/hindi/akbar-maharana-pratap-who-is-great-22591/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dharam Dubey]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 28 Apr 2019 10:45:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[इतिहास]]></category>
		<category><![CDATA[Featured]]></category>
		<category><![CDATA[अकबर और महाराणा प्रताप]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/05/akbar-pratap-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="अकबर और महाराणा प्रताप" decoding="async" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" fetchpriority="high" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/05/akbar-pratap-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/05/akbar-pratap-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/05/akbar-pratap-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/05/akbar-pratap.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" />इतिहास के ये दो शासक अकबर और महाराणा प्रताप का नाम&#160;हमने स्कूलों में कई बार सुना. इनके बहादुरी के किस्से भी हमने&#160;कई बार सुने.&#160;&#160;लेकिन एक बात हमें सालो से परेशान कर रहा&#160;है कि इन दोनों ही योद्धाओं में से महान योद्धा&#160;कौन था ? इतिहास के पन्नो को जब बार-बार पलटा गया तो ज्ञात हुआ कि [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="180" src="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/05/akbar-pratap-300x180.jpg" class="attachment-medium size-medium wp-post-image" alt="अकबर और महाराणा प्रताप" decoding="async" style="float:left; margin:0 15px 15px 0;" srcset="https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/05/akbar-pratap-300x180.jpg 300w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/05/akbar-pratap-768x461.jpg 768w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/05/akbar-pratap-400x240.jpg 400w, https://www.youngisthan.in/hindi/wp-content/uploads/2016/05/akbar-pratap.jpg 1000w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><p>इतिहास के ये दो शासक अकबर और महाराणा प्रताप का नाम&nbsp;हमने स्कूलों में कई बार सुना.</p>
<p>इनके बहादुरी के किस्से भी हमने&nbsp;कई बार सुने.&nbsp;&nbsp;लेकिन एक बात हमें सालो से परेशान कर रहा&nbsp;है कि इन दोनों ही योद्धाओं में से महान योद्धा&nbsp;कौन था ?</p>
<p>इतिहास के पन्नो को जब बार-बार पलटा गया तो ज्ञात हुआ कि ये&nbsp;दोनों ही&nbsp;अपनी जगह महान थे.</p>
<p>इन दोनों&nbsp;योद्धाओं&nbsp;के कारण भारत को बहोत&nbsp;फ़ायदा हुआ है. यहाँ तक कि अकबर और महाराणा प्रताप के इतिहास को जानकर हम&nbsp;&nbsp;काफी कुछ सिख सकते है,&nbsp;बशर्ते हमें मालूम हो कि सही मायने में&nbsp;उस वक्त हुआ&nbsp;क्या था.</p>
<p><strong>आइये हम आपको लिए चलते है इतिहास के&nbsp;उन पन्नो की ओर जहां &nbsp;धूल जम&nbsp;चुकी है.</strong></p>
<p><strong>&nbsp;हम&nbsp;आपको बताएंगे&nbsp;कि आखिर क्यों अकबर और महाराणा प्रताप &#8211; दोनों ही महान है.</strong></p>
<p>जहां एक ओर भारत&nbsp;को एक सूत्र में बांधने का&nbsp;काम जलालुद्दीन&nbsp;अकबर ने किया तो वही दुसरी ओर&nbsp;वीरता से आक्रमणकारी को पीछे ढकेलने को महान काम में प्रताप का&nbsp;कोई सानी न था.</p>
<p>दरअसल महान बनाने में अकबर और महाराणा प्रताप, इन&nbsp;दोनों के पीछे कई वफ़ादार वीर थे.</p>
<p>अगर अकबर&nbsp;को राजपूत राजाओं का समर्थन मिला हुआ था तो प्रताप को गद्दी पर बैठाने में उसके राज्य के लोगों का हाथ था. वरना, वचन के मुताबिक़ तो प्रताप के छोटे भाई जगमल्ल को गद्दी मिलनी थी.</p>
<p>अकबर ने पुरे भारत में अपना राज का सिक्का&nbsp;जमा लिया था, सिवाय&nbsp;मेवाड़ के. अकबर मेवाड़ पर भी हुकूमत चाहता था, जिसके लिए आक्रमण की तैयारी भी शुरू करदी थी. हालांकि अकबर ने मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप को अपने शासन के अंतर्गत राज्य चलाने की&nbsp;बात कही थी पर प्रताप एक स्वाभिमानी बहादुर योद्धा थे. वे अपना स्वतंत्र राज्य&nbsp;चाहते थे.</p>
<p>इसलिए प्रताप ने अकबर से युद्ध करना ठीक समझा.</p>
<p>अकबर सम्पूर्ण भारत में अपना राज्य फैलाने में जुटेहुए थे. वह&nbsp;भारत को प्रभुत्व-सम्पन्न राष्ट्र बनाना चाहते थे.&nbsp;इस काम के लिए उन्होंने कई भारतीय शासकों का समर्थन हासिल कर लिया था. अपने बाप दादा के समय की परंपरा को तोड़कर अपने आप को बादशाह घोषित कर दिया था. जहाँ बाबर और हुमायूँ सुल्तान थे, वहीं अकबर बादशाह था. बादशाह यानी सर्वोपरि राजा. जो किसी ख़लीफ़ा के अधीन नहीं था.</p>
<p>इतना ही नहीं, अकबर&nbsp;ने इस्लाम को भी परे कर रखा था. कुछ&nbsp;कठमुल्ले उनकी&nbsp;इस हरकत से सख़्त नाराज़ रहते और बेहद&nbsp;कोसते पर अकबर एक ना सुनते.</p>
<p>अकबर ने दिल्ली&nbsp;&nbsp;के सुल्तानों के समय से चले आ रहे जीतल नाम के सिक्के को भी &nbsp;ख़त्म कर दिया था और भारत की प्राचीन मुद्रा ‘रुपया’ के इस्तेमाल को प्रोत्साहित किया था.</p>
<p>एक तरह से अकबर ने पश्चिम एशिया से अपना संबंध ख़त्म कर दिया था और अपनी जड़ें भारत में जमा लीं थीं.</p>
<p>पर मेवाड़ के राणा, प्रताप सिंह को अकबर की अधीनता स्वीकार न थी. प्रताप के पहले कभी भी मेवाड़ के किसी शासक ने किसी का आधिपत्य नहीं माना था. मेवाड़ था ही इस तरह का.</p>
<p>दरअसल अकबर का&nbsp;मेवाड़ हासिल करना एक फायदे की बात&nbsp;थी. मेवाड़ एक ऐसा&nbsp;&nbsp;इलाक़ा था जो खेती के हिसाब से बहुत उपजाऊ था, फसल भरपूर होती थी, और कुछ इलाके तो ऐसे थे जहां पहाड़ियां थी, इन पहाड़ियों में&nbsp;दुश्मन को रोककर ख़त्म किया जा सकता था.</p>
<p>आपको बतादे कि मालवा और गुजरात से अजमेर-आगरा जाने वाले रास्ते&nbsp;&nbsp;मेवाड़ से ही गुज़रते थे. उनकी सुरक्षा का इंतज़ाम मेवाड़ का शासक और उसके ठिकानेदार करते. सीधी बात थी, रास्ता जितना निरापद होगा, उतने ही ज़्यादा व्यापारी उसका इस्तेमाल करेंगे और राज्य को उतना ही ज़्यादा फ़ायदा होगा.</p>
<p>खासतौर पर दिल्ली,&nbsp;आगरा, मालवा, अजमेर, गुजरात, सिंध आदि प्रदेशों पर शासन करने वाले मेवाड़ से दोस्ती करना ही श्रेयस्कर समझते थे. यही वजह थी कि अकबर&nbsp;मेवाड़ को हासिल करने के लिए कुछ भी करने को तैयार थे.</p>
<p>अकबर ने कई बार दूत भेजकर मेवाड़ को अपने खेमे में मिलाने की कोशिश की. ऐसी दोस्ती जिसमें अकबर को बादशाह मानना पड़े, यह प्रताप को नागवार था.</p>
<p>अंत में अकबर ने&nbsp;आमेर के राजा मानसिंह के नेतृत्व में फ़ौज भेजकर मेवाड़ पर क़ब्ज़ा करने की ठानी ली,</p>
<p>जहां एक ओर प्रताप के&nbsp;साथ कुल 3000 घुड़सवार और कुछ भील तीरंदाज़ थे तो&nbsp;वही दुसरी ओर&nbsp;मुग़ल सेना में 10,000 घुड़सवार, कुछ हाथी और तोपख़ाना थे. जिनकी मदत से अकबर ये लड़ाई बड़े आराम से जीत सकते थे.</p>
<p>फिर भी युद्ध 4 तक चला. बड़े ही वीरता से प्रताप ने युद्ध की स्थिति सम्भाले रखी थी, लेकिन&nbsp;मानसिंह&nbsp;&nbsp;पर हमला करते वक्त&nbsp;इत्तिफाक&nbsp;से&nbsp;&nbsp;प्रताप का घोड़ा चेतक बुरी तरह&nbsp;घायल हो गया और&nbsp;प्रताप को मैदान से हटना पड़ा.</p>
<p>उस समय की परिपाटी के मुताबिक़, ऐसा माना जाता कि&nbsp;सेना प्रमुख भाग खड़ा हुआ या मारा गया तो जीत विरोधी&nbsp;हमलावर की हो जाया&nbsp;करती थी.</p>
<p>घायल बहादुर घोड़े चेतक ने महाराणा प्रताप को सुरक्षित जगह हल्दीघाट तक पहुंचाकर अंतिम सांस ली. जिस जगह चेतक ने अपनी आखिरी सांसे ली थी, उसी जगह उसके मंदिर का निर्माण करवाया गया है.</p>
<p>महीनों बाद प्रताप ने&nbsp;भीलों की मदद से फिर फ़ौज खड़ी की और आने वाले वर्षों में मेवाड़ के काफ़ी हिस्से पर फिर से अपना शासन स्थापित कर लिया.</p>
<p>अकबर ने मान लिया कि प्रताप एक बहोत शक्तिशाली, बहादुर योद्धा है और फिर अपना शासन बढ़ाने के उद्देस्य से&nbsp;बंगाल और दक्कन की तरफ़ रुख मोड़ लिया.&nbsp;मुग़ल बादशाह जलालुद्दीन अकबर&nbsp;को धता बताने वाले राणा प्रतापको आने&nbsp;वाले समय में महाराणा की उपाधि दी गई और प्रताप के&nbsp;&nbsp;बहादुरी के&nbsp;किस्से इतिहास के पन्नो में छा गए.</p>
<p>एक युद्ध में&nbsp;&nbsp;महाराणा प्रताप गंभीर रूप से घायल हो गए, जिसके कुछ महोनो बाद उनका&nbsp;देहांत हो गया. उसके बाद उनके शासन का कार्यभार उनके सुपुत्र अमर सिंह ने&nbsp;सम्भाला.</p>
<p>ये दोनों ही वीर शासन कायम रखने के लिए और अपना साम्राज्य बढ़ाने के उद्देश्य से युद्ध लड़ते थे.</p>
<p>लेकिन इन्हे क्रूर शाशक नहीं कहा गया. अकबर और महाराणा प्रताप ने अपने राज्य में&nbsp;रहने वालो की देखभाल की और उनके सारे मांगो को सैदेव पूरा किया.</p>
<p>इतिहास में दर्ज ये&nbsp;सारी बातें&nbsp;साबित करती कि&nbsp;&nbsp;ये दोनों&nbsp;ही महान थे.</p>
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