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राम मंदिर के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की भावनात्मक दलीलें, अगली सुनवाई 14 मार्च को होगी 

राम मंदिर का मामला

राम मंदिर का मामला – लगता है कि राम मंदिर का भूत फिर से वापस आने वाला है।

2019 में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं और हर किसी ने कयास लगाए हुए हैं कि क्या इस बार राम मंदिर का भूत फिर से वापस आ जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर मामले की सुनवाई चल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को भावनात्मक दलीलें देने से खारिज कर दी हैं औऱ अगली सुनवाई की तारीख 14 मार्च दी है।

राम मंदिर का मामला –

राम मंदिर का मामला

कपिल सिब्बल ने सुनवाई टालने की, की थी अपील

बीते गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर मामले की सुनवाई की है। ये राम मंदिर की आखिरी सुनवाई की पहली कड़ी है जो कि तीन जजों की बेंच में शुरू हुई है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. अब्‍दुल नजीर की बेंच 13 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर रही है। गौरतलब है कि वरिष्‍ठ वकील व कांग्रेस नेता कपिल सिब्‍बल ने राम मंदिर की सुनवाई 2019 के लोकसभा चुनाव तक टालने की अपील की थी। लेकिन अदालत ने उनकी ये अपील ठुकरा दी थी।

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क्या है मामला

अयोध्‍या में बाबरी मस्जिद की कुल 2.7 एकड़ की विवादित जमीन पर हिंदुओं और मुस्लिमों, ने दावा ठोंक रखा है। 5 दिसंबर, 2017 को बेंच ने इस मामले की सुनवाई के लिए 8 फरवरी की तारीख तय की थी। लेकिन कुछ याचिकाकर्ताओं को राम मंदिर से दंगे होने की उम्मीद थी जिसके कारण उनकी ओर से कपिल सिब्‍बल, राजीव धवन और दुष्‍यंत दवे जैसे वरिष्‍ठ वकीलों ने सुनवाई टालने की गुहार लगाई थी। हालांकि अदालत ने सुनवाई को टालने से इनकार करते हुए वरिष्‍ठ अधिवक्‍ताओं के व्‍यवहार को ‘शर्मनाक’ करार दिया था। और कहा कि भावनात्मक दलीलें दोने के बजाय पक्ष ठोस सबूत रखेँ।

राम मंदिर का मामला

1951 में शुरू हुआ था या मामला

यह मामला 1951 में शुरू हुआ था। उस समय गोपाल सिंह ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका लगाकर विवादित स्‍थल पर पूजा करने की इजाजत मांगी थी। इसी के आगे 1959 में परमहंस रामचंद्र दास ने जहूर अहमद व 7 अन्‍य के खिलाफ मुकदमा दायर किया। लेकिन बाद में इस केस को वापस ले लिया गया और 2010 के फैसले में इसे खारिज माना गया था। इसके बाद निर्मोही अखाड़ा की ओर से उसके महंत ने अगला मुकदमा किया। इसके अलावा एक और मुकदमा हुआ था जो सुन्‍नी सेंट्रल वक्‍फ बोर्ड, यूपी और अयोध्‍या के नौ मुसलमानों की तरफ से हुआ था। अभी इनमें से अधिकतर लोगों की मौत हो चुकी है। आखिरी मुकदमा अयोध्‍या में श्री राम जन्‍मभूमि में भगवान श्री राम विराजमान और वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता व रिटायर्ड हाई कोर्ट जज श्री देवकी नंदन अग्रवाल द्वारा किया गया।

राम मंदिर का मामला

9,000 पन्नों का अनुवाद मांगा

ये इस मामले की आखिरी सुनवाई है जिसके कारण सुप्रीम कोर्ट इस मामले की आज से हर रोज सुनवाई करने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई की तरीख 14 मार्च दी है और तब तक 9,000 पन्नों का अनुवाद मांगा है। सुप्रीम कोर्ट केस से जुड़े अलग-अलग भाषाओं के ट्रांसलेट किए गए 9,000 पन्नों को देखेगा। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली बेंच मामले की नियमित सुनवाई करेगी।
उल्लेखनीय है कि इस मामले से जुड़े 9,000 पन्नों के दस्तावेज और 90,000 पन्नों में दर्ज गवाहियां पाली, फारसी, संस्कृत, अरबी सहित विभिन्न भाषाओं में हैं, जिसपर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कोर्ट से इन दस्तावेजों को अनुवाद कराने की मांग की थी।

ये है राम मंदिर का मामला – तो सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की सभी भावनात्माक दलीलों को रद्द करते हुए पुख्ता सबूत मांगे हैं और अगली सुनवाई में अनुवाद को सबूतों का आधार मानते हुए सुनवाई करेगी।