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कप्तान धोनी के वो बेमिसाल फैसले जिसने सबको हैरान कर दिया था

कप्तान धोनी के वो बेमिसाल फैसले जिसने सबको हैरान कर दिया था

धोनी के बेमिसाल फैसले – टीम इंडिया के सबसे सफल कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने अचानक ही टी-20 और वनडे की कप्तानी छौड़कर सबको हैरान कर दिया है।

जी हाँ केप्टन कूल धोनी की रणनीति अब हमें फील्ड पर देखने को नहीं मिलेगी। इसके पिछे क्या वजह है वो तो हम फिलहाल आपको नही बता सकते लेकिन कप्तान धोनी से जुड़ी कुछ ऐसी बाते बता सकते है जो आपको हैरान कर देगी।

दरअसल धोनी के बेमिसाल फैसले, जो बेमिसाल तो थे ही साथ ही हैरान करने वाले भी थे।

तो आप भी जानिये एम एस धोनी के बेमिसाल फैसले जो उन्होनें फिल्ड पर लिये थे जिससे लोग हैरान रह गये थे, लेकिन बाद में सही साबित हुये थे-

धोनी के बेमिसाल फैसले –

1.साल 2007 टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल-

इस मैच के आखिरी ओवर में महेंद्र सिंह धोनी के एक फैसले ने जोगिन्दर शर्मा को हीरो बना दिया था।

दरअसल पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल में जब आखरी ओवर में पाकिस्तान को 6 बोल पर 13 रन की जरूरत थी ऐसे में कप्तान धोनी ने अनुभवी गेंदबाज हरभजन को बॉल ना देकर नए नवेले जोगिन्दर शर्मा को दी, उनके इस फैसले से स्टेडियम में सब लोग हैरान रह गए, लेकिन जोगिन्दर ने तीसरी ही गेंद पर मिस्बाह उल हक़ का विकेट लेकर धोनी के फैसले को सही साबित कर दिया।

2.साल 2011 वर्ल्ड कप फाइनल में युवी की जगह खुद उतरे थे बेटिंग पर-

श्रीलंका के खिलाफ फाइनल में धोनी युवराज सिंह की जगह पर बेटिंग करने उतरे थे।

दरअसल दूसरी स्ट्राइक पर पहले से ही बांये हाथ के बल्लेबाज गौतम गंभीर मौजूद थे ऐसे में युवी भी बांये हाथ के बल्लेबाज थे, तो कप्तान खुद उनकी जगह पर बेटिंग पर उतरे और नतीजा दुनिया के सामने है। धोनी ने कुलशेखरा की गेंद पर छक्का मारकर भारत को वर्ल्ड चैम्पियन बना दिया। इस मैच में धोनी ने जबरदस्त नाबाद 91 रन बनाये थे।

3.युवराज सिंह से करवाई गेंदबाजी-

युवराज सिंह की पहचान भले ही बल्लेबाज के रूप में है लेकिन वे पार्ट टाइम गेंदबाजी भी कर लेते है।

बात 2011 वर्ल्ड कप की है इस टूर्नामेंट में कप्तान धोनी ने युवराज सिंह को रेगुलर गेंदबाज की तरह इस्तेमाल किया था। 9 मैचो मे युवराज ने 75 ओवर डाले और 15 विकेट लिए थे। उस वक्त लोगो को उनका युवराज से बॉलिंग करवाना हैरान कर देने वाला फैसला था।

4.जब जताया यंगिस्तान पर भरोसा-

बात 2008 की है, ऑस्ट्रेलिया में चैंपियंस ट्राफी के लिए उन्होंने चयनकर्ताओं से मांग रखी कि टीम में सबसे युवा खिलाडी ही रखे जाये।

दरअसल धोनी का मनना था की ऑस्ट्रेलिया के बड़े मैदानों में उम्रदराज खिलाडी रन रोकने में नाकाम रहेंगे। उस वक्त उनके इस फैसले की खूब आलोचना हुई, लेकिन जब वो पहली बार ऑस्ट्रेलिया की जमीन पर ट्राई-सीरिज जीते तो सब लोगो का मुह बंद हो गया।

5.जब ईशांत को बनाया हीरो-

बात 2013 की है, इंग्लेंड में खेले जा रहे चैंपियंस ट्राफी के फाइनल मैच को जब बारिश के कारण 20-20 ओवर का कर दिया गया था। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड को 130 रनों का लक्ष्य दिया। जिसके जबाव में इंग्लैंड मॉर्गन और बोपारा की बदौलत जीत की तरफ बढ़ रही थी इंगलैंड को इस मैच में जीतने के लिए 18 गेंदों में 28 रनों की जरुरत थी जो की मुश्किल नहीं था। ऐसे में धोनी ने अपने सबसे ज्यादा रन देने वाले गेंदबाज ईशांत को गेंद थामी ये फैसला सभी को चौंकाने वाला था। लेकिन जब इशांत ने मॉर्गन और बोपारा को एक ही ओवर में आउट कर दिया और इंग्लैंड की जीत की उम्मीद को तोड़ दिया धोनी का ये फैसला भी सही साबित हुआ।

6.रोहित को प्रमोट करते ही वो चमक उठे-

दरअसल रोहित शर्मा पहले मिडिल ऑर्डर में बेटिंग करने उतरते थे, रोहित अपनी प्रतिभा का सही प्रदर्शन नहीं कर पा रहे थे ऐसे में धोनी ने रोहित को प्रमोट करके ओपनिंग बेस्टमेन के रूप में प्रमोट किया जिससे वो चमक उठे और देखो उनके वर्ल्ड रिकॉर्ड को, दो दोहरे शतक मार चूका है ये बंदा वन डे मैच में।

7.जब नेहरा पर भरोसा दिखाया-

2011 वर्ल्ड कप की बात है, शुरुआत में आशीष नेहरा कुछ कमाल नहीं दिखा पा रहे थे, फिर भी धोनी ने सेमिफाईनल में पाकिस्तान के खिलाफ नेहरा को मौका दिया वो भी सफल गेंदबाज आश्विन की जगह पर ऐसे में सब हैरान हुए की सफल गेंदबाज को बिठाना गलत फैसला है। लेकिन नतीजा क्या हुआ यहाँ भी धोनी का दाव काम आया नेहरा ने 10 ओवर में मात्र 30 रन दिए और दो महत्वपूर्ण विकेट चटकाए।

ये है धोनी के बेमिसाल फैसले – फील्ड पर इस तरह के बेमिसाल फैसले लेना सभी कप्तानों के बस की बात नहीं है। शायद धोनी के बेमिसाल फैसले है जो उन्हें भारत और दुनिया का सबसे महान कप्तान बनाती है।

 
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